ज्योतिष एक ऐसा शास्त्र है जिसको सभी देशवासी किसी न किसी रूप में मानते है | ज्योतिष शास्त्र प्रत्यक्ष फलदायक है | तभी लिखा है "प्रत्यक्ष ज्योतिष शास्त्र चन्द्रा कौं यस्त्र साक्षिणौं" वैसे तो इसके अनेक भाग हैं परन्तु मुख्य भाग गणित और फलित ही हैं | इन दोनों का अन्योन्याश्रित सम्बन्ध है | सभी देशों में ज्योतिष शास्त्र ज्योतिषियों के जीवन निर्वाह का मार्ग है भारतवर्ष में तो विशेष कर हिन्दू जाति का जन्म से लेकर मरण पर्यन्त कोई भी काम बिना इसके हो ही नहीं सकता | ज्योतिष शास्त्र के आश्रय से ही वर्षों पहले सूर्य-चंद्र ग्रहण, तिथि, वार आरम्भ मध्य और मोक्ष काल बताया जा सकता है परन्तु इन सब बातों के बतलाने में सिद्धहस्त होने के लिये अनेक ग्रंथों को पढ़ना परमावश्यक होता है |
बिना इसके विशेष अनुभव के अटकल-पच्चू बात बतलाने से बात तो सच्ची बैठती है साथ ही इस शास्त्र पर लोगों का अविश्वास और हो जाता है यह बड़ा हानिकारक है | ज्योतिष शास्त्र इतना गंभीर विषय है कि इसको पढ़ने और समझने के लिये पर्याप्त समय चाहिये | अतः बहुत कम लोग इस विषय के मर्मज्ञ पाये जाते हैं | केवल हिंदी भाषा का अच्छा ज्ञान रखने वाले इस ब्लॉग से ज्योतिष शास्त्र सम्बन्धी सारा काम अच्छी तरह चला सकते हैं |
जो लोग ज्योतिष का का ज्ञान प्राप्त करने के लिये पढ़ना चाहते हैं उनके लिये तो यह सर्वोत्तम ब्लॉग है | इस ब्लॉग में कुंडली पर से फल कहना, मुहूर्त कहना, प्रश्न का फल कहना, तिथि निर्णय, स्वप्न का शुभाशुभ विचार, अंग फड़कने का फल, छिपकली गिरने का फल, शरीर में तिल का फल आदि आदि अनेक ज्ञातव्य बाते दी हुयी हैं | विंशोत्तरी योगिनी दशा मूल,अंतर प्रत्यंतर सूक्ष्म दशाएं बनाना आदि - इस प्रकार ज्योतिष शास्त्र का सर्वतोन्मुखी साधारण ज्ञान होने के लिये यह ब्लॉग अत्यंत उपादेय है |


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