Tuesday, October 23, 2018

मांगलिक दोष का विशेष विचार

मांगलिक दोष केवल मंगल के १,४,७,८,१२ स्थान में रहने से ही नहीं होता | यह अन्य अनेक ग्रहों से भी होता है तथा मंगल यदि पूर्वोक्त स्थानों में हो भी किन्तु -
अजे लग्ने व्यये चापे पाताले वृश्चिके कुजे |
धुते मृगेष्टसे कर्के भौमदोषों न विधते ||

अर्थात् यदि मंगल --
लग्न मेष, धन बारहे, वृश्चिक चौथे होय |
मकर सातवें, आठवें कर्क न दोषी सोय ||

यदि मंगल लग्न में मेष का होकर पड़ा हो या धन का होकर बारहवें हो, वृश्चिक का होकर चौथे हो, मकर का होकर सातवें हो या कर्क का होकर आठवें में हो तो वह दोषकारी नहीं होता |

मांगलिक विचार

श0 वि0 - होवे मंगल बारहें, लग्न में या सातवें आठवें | 
               चौथे, तो वह मंगली वर कहो या हो वधू ब्याह में || 
                होवे जो वर मंगली, यमपुरी जावे वधू शीघ्र ही | 
                कन्या, तो वर मृत्यु होंय शुभ जो दोनों रहें मंगली || 

दो0 - सतवें, चौथे, लग्न में, बरहें, नववे होय | 
         शनि, हो वर हो या वधू, नहीं मंगली सोय ||

                      मांगलिक दोष का विशेष विचार

मांगलिक दोष का विशेष विचार

मांगलिक दोष केवल मंगल के १,४,७,८,१२ स्थान में रहने से ही नहीं होता | यह अन्य अनेक ग्रहों से भी होता है तथा मंगल यदि पूर्वोक्त स्थानों में ...