श0 वि0 - होवे मंगल बारहें, लग्न में या सातवें आठवें |
चौथे, तो वह मंगली वर कहो या हो वधू ब्याह में ||
होवे जो वर मंगली, यमपुरी जावे वधू शीघ्र ही |
कन्या, तो वर मृत्यु होंय शुभ जो दोनों रहें मंगली ||
दो0 - सतवें, चौथे, लग्न में, बरहें, नववे होय |
शनि, हो वर हो या वधू, नहीं मंगली सोय ||
मांगलिक दोष का विशेष विचार
चौथे, तो वह मंगली वर कहो या हो वधू ब्याह में ||
होवे जो वर मंगली, यमपुरी जावे वधू शीघ्र ही |
कन्या, तो वर मृत्यु होंय शुभ जो दोनों रहें मंगली ||
दो0 - सतवें, चौथे, लग्न में, बरहें, नववे होय |
शनि, हो वर हो या वधू, नहीं मंगली सोय ||
मांगलिक दोष का विशेष विचार
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