अश्विनी, भरणी, कृतिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफ़ाल्गुनि, हस्त, चित्रा, स्वाती, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़, उत्तराषाढ़, (अभिजित्) श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती |
इस प्रकार सब नक्षत्र सत्ताईस हैं | अभिजित को लेकर २८ हैं | प्रत्येक नक्षत्र ६० दण्ड रहता है जिस नक्षत्र का जो स्वामी है | उस नाम से तथा उसके पर्यायवाची शब्द से उस नक्षत्र का बोध होता है | जैसे - आर्द्रा नक्षत्र के स्वामी "शिव" हैं सो इस नाम से तथा इसके पर्यायवाची "महादेव" "शंकर" "भूतनाथ" इत्यादिकों से भी नक्षत्र का बोध होगा | इनको ऋतु, भ' नक्षत्र, तारका उडु, इत्यादिक भी कहते हैं |


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